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वैजयंतीमाला, रेखा और श्रीदेवी से लेकर रश्मिका मंदाना, नयनतारा और साई पल्लवी तक, जानिए उन साउथ इंडियन सितारों के बारे में जिन्होंने बॉलीवुड में बनाई खास पहचान।

हिंदी एंटरटेनमेंट डेस्क
Written By: हिंदी एंटरटेनमेंट डेस्क
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रेखा, श्रीदेवी, दीपिका पादुकोण, रश्मिका मंदाना और नयनतारा उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने साउथ सिनेमा से बॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाई।
रेखा, श्रीदेवी, दीपिका पादुकोण, रश्मिका मंदाना और नयनतारा उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने साउथ सिनेमा से बॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाई।

हिंदी सिनेमा में दक्षिण भारत से आए कलाकारों का योगदान कई दशकों से रहा है। 1950 के दशक की शानदार डांसर्स से लेकर आज के पैन-इंडिया सुपरस्टार्स तक, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में जन्मे या पले-बढ़े कलाकारों ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है। इन सितारों ने हिंदी फिल्मों में अभिनय, डांस और अपनी स्क्रीन प्रेजेंस के जरिए स्टारडम की परिभाषा को भी नए मायने दिए।

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इस सिलसिले में अब नया नाम साई पल्लवी का जुड़ गया है। उन्होंने अपनी बहुप्रतीक्षित हिंदी फिल्म 'एक दिन' से बॉलीवुड में डेब्यू किया। सुनील पांडे के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक ड्रामा को आमिर खान, मंसूर खान और अपर्णा पुरोहित ने आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। फिल्म में साई पल्लवी के साथ जुनैद खान नजर आए हैं। यह 2016 की थाई फिल्म 'वन डे' का आधिकारिक हिंदी रीमेक है। फिल्म 1 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।

तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाली साई पल्लवी करीब एक दशक से मलयालम, तमिल और तेलुगु सिनेमा में सक्रिय हैं। 'प्रेमम', 'फिदा', 'लव स्टोरी', 'श्याम सिंघा रॉय', 'गार्गी' और 'अमरन' जैसी फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई। उनके हिंदी सिनेमा में कदम रखने के मौके पर आइए नजर डालते हैं उन दक्षिण भारतीय कलाकारों पर, जिन्होंने उनसे पहले बॉलीवुड में अपनी जगह बनाई।

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1. वैजयंतीमाला

वैजयंतीमाला को भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार और देशभर में बड़ी पहचान हासिल करने वाली पहली दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों में गिना जाता है। उनका जन्म 1933 में मद्रास के एक तमिल भाषी परिवार में हुआ था।

उन्होंने 1949 की तमिल फिल्म 'वाझकई' से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद 1951 में इसी फिल्म के हिंदी रीमेक 'बहार' से हिंदी सिनेमा में कदम 
रखा। 1954 की फिल्म 'नागिन' उनके करियर का अहम पड़ाव बनी। बिमल रॉय की 'देवदास' (1955) में चंद्रमुखी के किरदार को उनके सबसे यादगार प्रदर्शनों में गिना जाता है।

वैजयंतीमाला ने 'साधना' (1958), 'गंगा जमुना' (1961) और 'संगम' (1964) के लिए तीन बार फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड जीता। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'नया दौर' (1957), 'मधुमती' (1958), 'आम्रपाली' (1966) और 'ज्वेल थीफ' (1967) भी शामिल हैं। उन्हें 1968 में पद्म श्री और 2024 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

2. वहीदा रहमान

1938 में तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में जन्मीं वहीदा रहमान ने बचपन से ही भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने 1955 में तेलुगु फिल्म 'रोजुलु मारायी' से अभिनय की शुरुआत की।

फिल्म की सफलता के मौके पर गुरु दत्त की नजर उन पर पड़ी। इसके बाद वह बॉम्बे आईं और उन्हें 'सीआईडी' (1956) में काम मिला। गुरु दत्त के साथ उनकी फिल्मों में 'प्यासा' (1957), 'कागज के फूल' (1959), 'चौदहवीं का चांद' (1960) और 'साहिब बीबी और गुलाम' (1962) शामिल हैं। इन फिल्मों को विश्व सिनेमा की उल्लेखनीय कृतियों में गिना जाता है।

देव आनंद के साथ 'गाइड' (1965) के लिए उन्होंने फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड जीता। 'नील कमल' (1968) के लिए भी उन्हें यही सम्मान मिला। 1971 की 'रेशमा और शेरा' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। वहीदा रहमान को 1972 में पद्म श्री, 2011 में पद्म भूषण और 2021 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

3. हेमा मालिनी

'ड्रीम गर्ल' के नाम से मशहूर हेमा मालिनी का जन्म 1948 में तिरुचिरापल्ली के पास अम्मनकुडी में एक तमिल अयंगर परिवार में हुआ था। उन्होंने 1963 की तमिल फिल्म 'इधु सत्यियम' में डांसर के रूप में संक्षिप्त भूमिका निभाई थी। एक दक्षिण भारतीय निर्देशक ने उन्हें यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह “बहुत दुबली” हैं।

लेकिन बॉलीवुड में उनकी किस्मत अलग थी। 1968 में राज कपूर के साथ 'सपनों का सौदागर' से उन्होंने हिंदी फिल्मों में बतौर लीड एक्ट्रेस शुरुआत की। 1970 का दशक उनके करियर के लिए बेहद खास रहा। इस दौरान उन्होंने 'जॉनी मेरा नाम' (1970), 'अंदाज' (1971), 'सीता और गीता' (1972), 'शोले' (1975), 'ड्रीम गर्ल' (1977) और 'मीरा' (1979) जैसी फिल्मों में काम किया।

'सीता और गीता' में उनके डबल रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला। 'शोले' में बसंती का उनका किरदार आज भी याद किया जाता है। उन्होंने 2000 के दशक में भी 'बागबान' (2003) और 'वीर-जारा' (2004) जैसी फिल्मों में काम किया। हेमा मालिनी को 2000 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

4. रेखा

1954 में मद्रास में भानुरेखा गणेशन के रूप में जन्मीं रेखा, दिग्गज तमिल अभिनेता जेमिनी गणेशन और तेलुगु अभिनेत्री पुष्पवल्ली की बेटी हैं। किशोरावस्था में जब उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा, तब उन्हें हिंदी बोलने में काफी परेशानी होती थी।

नवीन निश्चल के साथ 'सावन भादों' (1970) उनकी हिंदी डेब्यू फिल्म थी। शुरुआत में उन्हें हिंदी उच्चारण, नए फिल्म उद्योग और अपनी शक्ल-सूरत को लेकर की गई टिप्पणियों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन रेखा ने खुद को नए सिरे से तैयार किया। उन्होंने हिंदी सीखी, डांस पर काम किया और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।

इसके बाद उन्होंने 'मुकद्दर का सिकंदर' (1978), 'मिस्टर नटवरलाल' (1979), 'खूबसूरत' (1980), 'सिलसिला' (1981) और 'उमराव जान' (1981) जैसी यादगार फिल्मों में अभिनय किया। 'उमराव जान' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। 'खून भरी मांग' (1988) उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि रही। 2006 में 'कृष' के जरिए वह नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी पहुंचीं। रेखा को 2010 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

5. श्रीदेवी

1963 में तमिलनाडु के शिवकाशी में जन्मीं श्रीदेवी ने महज चार साल की उम्र में 1967 की तमिल फिल्म 'कंधन करुणई' से अपना करियर शुरू किया। वह तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम करते हुए कैमरे के सामने बड़ी हुईं।

1979 में 'सोलवां सावन' से उन्होंने हिंदी फिल्मों में लीड अभिनेत्री के तौर पर शुरुआत की। यह उनकी तमिल फिल्म '16 वयथिनिले' का रीमेक थी। हालांकि, 

1983 की 'हिम्मतवाला' ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया।

इसके बाद श्रीदेवी ने एक ऐसे दौर में काम किया जिसने हिंदी सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी फिल्मों में 'सदमा' (1983), 'तोहफा' (1984), 'नगीना' (1986), 'मिस्टर इंडिया' (1987), 'चांदनी' (1989), 'चालबाज' (1989), 'लम्हे' (1991) और 'खुदा गवाह' (1992) शामिल हैं।

भारत की पहली महिला सुपरस्टार कही जाने वाली श्रीदेवी ने 15 साल के अंतराल के बाद 2012 में 'इंग्लिश विंग्लिश' से शानदार वापसी की। 2017 की 'मॉम' के लिए उन्हें मरणोपरांत सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उन्हें 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। फरवरी 2018 में उनके अचानक निधन से सिनेमा जगत में ऐसी कमी आई, जिसकी भरपाई मुश्किल है।

6. कमल हासन

कमल हासन जब हिंदी सिनेमा में आए, तब तक वह तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में 100 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके थे।
उनकी हिंदी फिल्मों में एंट्री के. बालाचंदर की 'एक दूजे के लिए' (1981) से हुई। यह उनकी अपनी तेलुगु हिट फिल्म 'मारो चरित्र' का हिंदी रीमेक थी। फिल्म में कमल हासन की टूटी-फूटी हिंदी को कहानी का हिस्सा बनाया गया था। यह 1981 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में शामिल हुई और अमिताभ बच्चन की 'लावारिस' के बाद दूसरे स्थान पर रही। इस सफलता के साथ कमल हासन बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाले पहले दक्षिण भारतीय पुरुष सितारों में शामिल हुए।

इसके बाद उन्होंने 'सदमा' (1983), 'सागर' (1985), 'अप्पू राजा' (1990), 'हिंदुस्तानी' (1996) और 'चाची 420' (1997) जैसी फिल्मों में काम किया। 'सागर' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला।

7. नागार्जुन

तेलुगु सुपरस्टार अक्किनेनी नागार्जुन दिग्गज अभिनेता अक्किनेनी नागेश्वर राव के बेटे हैं। उन्होंने 1990 में 'शिवा' से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। यह राम गोपाल वर्मा की 1989 की तेलुगु ब्लॉकबस्टर 'सिवा' का हिंदी रीमेक थी।

हिंदी में फिल्म की सफलता के बाद नागार्जुन 'खुदा गवाह' (1992) में अमिताभ बच्चन और श्रीदेवी के साथ नजर आए। इसके बाद महेश भट्ट निर्देशित द्विभाषी फिल्म 'क्रिमिनल' (1994), 'अंगार' और महेश भट्ट की चर्चित फिल्म 'जख्म' (1998) में भी उन्होंने काम किया।

2003 में 'एलओसी: कारगिल' के बाद वह लगभग दो दशकों तक हिंदी सिनेमा से काफी हद तक दूर रहे। फिर 2022 में अयान मुखर्जी की 'ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन – शिवा' से लौटे। इसमें उन्होंने रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ काम किया और अनीश शेट्टी के किरदार में नजर आए।

8. ऐश्वर्या राय

1973 में कर्नाटक के मंगलुरु में तुलु भाषी बंट परिवार में जन्मीं ऐश्वर्या राय भारतीय सिनेमा के सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले वैश्विक चेहरों में शामिल हुईं। 1994 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद उन्होंने 1997 में मणिरत्नम की तमिल फिल्म 'इरुवर' से अभिनय की शुरुआत की। उसी साल उनकी हिंदी डेब्यू फिल्म 'और प्यार हो गया' भी रिलीज हुई।

संजय लीला भंसाली की 'हम दिल दे चुके सनम' (1999) के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला। 'देवदास' (2002) के लिए उन्होंने दूसरा पुरस्कार जीता। इसके बाद 'ताल' (1999), 'मोहब्बतें' (2000), 'धूम 2' (2006), 'गुरु' (2007), 'जोधा अकबर' (2008), 'गुजारिश' (2010), 'सरबजीत' (2016) और 'ऐ दिल है मुश्किल' (2016) जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया।

मणिरत्नम की दो भागों वाली फिल्म 'पोन्नियिन सेल्वन' 2022 और 2023 में रिलीज हुई। ऐश्वर्या राय को 2009 में पद्म श्री और 2012 में फ्रांस के ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स से सम्मानित किया गया।

9. विद्या बालन

मुंबई में तमिल अय्यर परिवार में जन्मीं विद्या बालन का परिवार मूल रूप से केरल के पलक्कड़ से जुड़ा है। हिंदी सिनेमा में आने से पहले उन्हें मलयालम और तमिल फिल्मों के कई ऐसे प्रोजेक्ट्स का सामना करना पड़ा, जो आगे नहीं बढ़ सके। इसके बाद 2003 में उन्होंने बंगाली फिल्म 'भालो थेको' से शुरुआत की।
प्रदीप सरकार की 'परिणीता' (2005), जिसमें वह सैफ अली खान के साथ नजर आईं, उनकी हिंदी डेब्यू फिल्म थी। इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू अवॉर्ड मिला।

इसके बाद विद्या ने 'लगे रहो मुन्ना भाई' (2006), 'भूल भुलैया' (2007), 'पा' (2009), 'इश्किया' (2010), 'नो वन किल्ड जेसिका' (2011) और 'कहानी' (2012) जैसी फिल्मों में काम किया। 'द डर्टी पिक्चर' (2011) में तमिल अभिनेत्री सिल्क स्मिता की भूमिका उनके करियर के सबसे अहम पड़ावों में रही। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। महिला-केंद्रित फिल्मों को बॉलीवुड में प्रमुखता दिलाने का श्रेय भी अक्सर उन्हें दिया जाता है। 2014 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

10. दीपिका पादुकोण

दीपिका पादुकोण का जन्म 1986 में कोपेनहेगन में हुआ था। उनके माता-पिता मंगलुरु के कोंकणी भाषी सारस्वत ब्राह्मण परिवार से हैं और दीपिका का पालन-पोषण बेंगलुरु में हुआ। उनके पिता मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण हैं।

दीपिका ने 2006 में कन्नड़ फिल्म 'ऐश्वर्या' से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद 2007 में फराह खान की 'ओम शांति ओम' में शाहरुख खान के साथ काम करके वह देशभर में लोकप्रिय हो गईं। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू अवॉर्ड मिला।

'कॉकटेल' (2012) के बाद वह देश की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'ये जवानी है दीवानी' (2013), 'चेन्नई एक्सप्रेस' (2013), 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' (2013), 'बाजीराव मस्तानी' (2015), 'पीकू' (2015), 'पद्मावत' (2018), 'पठान' (2023) और साइंस-फिक्शन फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' (2024) शामिल हैं।

11. आर. माधवन

तमिल भाषी अभिनेता आर. माधवन को उनके प्रशंसक प्यार से 'मैडी' कहते हैं। मणिरत्नम की तमिल फिल्म 'अलाई पायुथे' (2000) से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने गौतम वासुदेव मेनन की 'रहना है तेरे दिल में' (2001) से हिंदी फिल्मों में बतौर लीड एक्टर शुरुआत की। समय के साथ यह फिल्म कल्ट स्टेटस हासिल करती गई।

माधवन ने 'रंग दे बसंती' (2006), मणिरत्नम की 'गुरु' (2007) और राजकुमार हिरानी की '3 इडियट्स' (2009) जैसी फिल्मों से हिंदी सिनेमा में अपनी जगह मजबूत की। '3 इडियट्स' उस समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बनी।

इसके बाद वह 'तनु वेड्स मनु' (2011), इसके हिट सीक्वल 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' (2015), 'रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट' (2022) और 'शैतान' (2024) में नजर आए। 'रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट' का निर्देशन भी उन्होंने किया था। माधवन को 2026 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

12. धनुष

1983 में चेन्नई में वेंकटेश प्रभु के रूप में जन्मे तमिल सुपरस्टार धनुष ने 2013 में आनंद एल. राय की फिल्म 'रांझणा' से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। इसमें वह सोनम कपूर के साथ नजर आए।

अपने किरदार की तैयारी के लिए धनुष ने हिंदी उच्चारण की ट्रेनिंग ली। बनारस के जुनूनी प्रेमी कुंदन के उनके अभिनय ने उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड दिलाया और बेस्ट एक्टर कैटेगरी में नामांकन भी मिला।

इसके बाद उन्होंने आर. बाल्की की 'शमिताभ' (2015) में अमिताभ बच्चन, कॉमेडी फिल्म 'वीआईपी 2' (2017) में काजोल और आनंद एल. राय की 'अतरंगी रे' (2021) में अक्षय कुमार और सारा अली खान के साथ काम किया। 2025 में वह फिर आनंद एल. राय की फिल्म 'तेरे इश्क में' में नजर आए। धनुष ने 'द एक्स्ट्राऑर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर' (2018) और 'द ग्रे मैन' (2022) के जरिए हॉलीवुड में भी काम किया।

13. पूजा हेगड़े

1990 में मुंबई में जन्मीं पूजा हेगड़े का परिवार कर्नाटक के उडुपी से जुड़ा है और वह तुलु भाषी बंट परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने 2012 में तमिल फिल्म 'मुगामूडी' और 2014 में तेलुगु फिल्म 'ओका लैला कोसम' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।

बॉलीवुड में उनकी पहली फिल्म आशुतोष गोवारिकर की पीरियड ड्रामा 'मोहनजो दारो' (2016) थी, जिसमें वह ऋतिक रोशन के साथ नजर आईं। इसके बाद तेलुगु फिल्मों 'डीजे: दुव्वाडा जगन्नाधम' (2017), 'अरविंदा समेथा वीरा राघव' (2018), 'महर्षि' (2019) और 'अला वैकुंठपुरमुलू' (2020) ने उन्हें तेलुगु सिनेमा की बड़ी स्टार बना दिया।

हिंदी फिल्मों में वह 'हाउसफुल 4' (2019), रोहित शेट्टी की 'सर्कस' (2022) में रणवीर सिंह के साथ और 'किसी का भाई किसी की जान' (2023) में सलमान खान के साथ नजर आईं।

14. रश्मिका मंदाना

1996 में कर्नाटक के कोडागु जिले के विराजपेट में जन्मीं रश्मिका मंदाना ने 2016 की कन्नड़ हिट 'किरिक पार्टी' से अपने करियर की शुरुआत की। तेलुगु फिल्मों 'गीता गोविंदम' (2018) और 'डियर कॉमरेड' (2019) ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई। इसके बाद 'पुष्पा: द राइज' (2021) ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। फिल्म का गाना 'सामी सामी' भी खासा चर्चित हुआ।

रश्मिका ने विकास बहल की 'गुडबाय' (2022) से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें वह अमिताभ बच्चन के साथ थीं। इसके बाद वह सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ नेटफ्लिक्स की 'मिशन मजनू' (2023), रणबीर कपूर के साथ संदीप रेड्डी वांगा की ब्लॉकबस्टर 'एनिमल' (2023) और विक्की कौशल के साथ लक्ष्मण उतेकर की 'छावा' (2025) में नजर आईं। 'छावा' में उन्होंने महारानी येसुबाई भोंसले का किरदार निभाया।

इसके बाद रश्मिका सलमान खान के साथ 'सिकंदर' और आयुष्मान खुराना के साथ 'थामा' में भी नजर आईं।

15. जूनियर एनटीआर

तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार जूनियर एनटीआर, एनटी रामा राव के पोते हैं। 'आरआरआर' के प्रशंसक उन्हें कोमारम भीम के किरदार और गोल्डन ग्लोब जीतने वाली फिल्म से वैश्विक पहचान दिलाने वाले कलाकार के रूप में जानते हैं।

जूनियर एनटीआर ने 2025 में अयान मुखर्जी की 'वॉर 2' से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की इस फिल्म में वह ऋतिक रोशन के साथ नजर आए। फिल्म को मिली-जुली समीक्षाएं मिलीं, लेकिन जूनियर एनटीआर की हिंदी सिनेमा में एंट्री दक्षिण भारतीय कलाकारों के बॉलीवुड तक पहुंचने के लंबे सफर का एक और अहम पड़ाव बनी। इस सिलसिले की नई कड़ी साई पल्लवी के रूप में सामने आई है।

16. नयनतारा

नयनतारा का जन्म 18 नवंबर 1984 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका जन्म नाम डायना मरियम कुरियन है। वह मलयाली सीरियन ईसाई माता-पिता कुरियन कोडियाट्टू और ओमना कुरियन की बेटी हैं।

दक्षिण भारतीय सिनेमा में 'लेडी सुपरस्टार' के नाम से मशहूर नयनतारा ने करीब दो दशक तक बॉलीवुड में कदम रखने के बजाय तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों पर ध्यान दिया। आखिरकार 2023 में उन्होंने एटली की हिंदी निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'जवान' से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। इसमें वह शाहरुख खान के साथ नजर आईं।

नयनतारा ने फिल्म में नर्मदा नाम की सख्त और बेबाक आतंकवाद-रोधी अधिकारी की भूमिका निभाई। उनके किरदार में गंभीरता और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस देखने को मिली। 'जवान' दुनियाभर में 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई के साथ ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बनी। अब वह सलमान खान के साथ एक अनटाइटल्ड फिल्म में नजर आने वाली हैं।

17. असिन थोट्टुमकल

असिन थोट्टुमकल का बॉलीवुड करियर भले ही लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्होंने कम समय में अपनी पहचान बना ली। तमिल और तेलुगु सिनेमा में स्टार बनने के बाद उन्होंने 2008 में आमिर खान की फिल्म 'गजनी' से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। इसमें उन्होंने तमिल मूल फिल्म में निभाए अपने किरदार को दोबारा निभाया।

'गजनी' बॉक्स ऑफिस पर एक अहम फिल्म साबित हुई और असिन को हिंदी फिल्मों के दर्शकों के बीच तुरंत पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने 'रेडी', 'हाउसफुल 2', 'बोल बच्चन' और 'खिलाड़ी 786' जैसी लोकप्रिय व्यावसायिक फिल्मों में काम किया। असिन ने बॉलीवुड में कई दशक नहीं बिताए, लेकिन कम समय में दर्शकों से जुड़ने और अपनी छाप छोड़ने में सफल रहीं।

खास उल्लेख: रजनीकांत

रजनीकांत का नाम भी इस चर्चा में अहम है, हालांकि लेख में उन्हें दक्षिण भारतीय मूल के कलाकारों की मुख्य सूची से अलग रखा गया है। उनका जन्म 1950 में शिवाजी राव गायकवाड़ के रूप में एक मराठी भाषी परिवार में हुआ था, लेकिन उनका जीवन और करियर तमिल सिनेमा से गहराई से जुड़ा रहा।
उन्होंने 1983 में अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'अंधा कानून' से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। इस फिल्म ने दो ऐसे सुपरस्टार्स को साथ लाया, जिनकी दोस्ती लंबे समय तक कायम रही। इसके बाद रजनीकांत ने 'मेरी अदालत' (1984), 'जॉन जानी जनार्दन' (1984), 'गिरफ्तार' (1985), 'भगवान दादा' (1986), श्रीदेवी के साथ 'चालबाज' (1989) और अमिताभ बच्चन के साथ 'हम' (1991) में काम किया।

बाद में उन्होंने तमिल सिनेमा में लौटकर 'बाशा', 'पदयप्पा', 'एंथिरन' और 'जेलर' जैसी फिल्मों में काम किया। शाहरुख खान की 'रा.वन' (2011) में उनका क्रॉसओवर अपीयरेंस भी प्रशंसकों के लिए खास पल रहा।

खास उल्लेख: प्रभास

प्रभास का बॉलीवुड से जुड़ाव बाकी कलाकारों से कुछ अलग रहा है। उन्होंने पारंपरिक अर्थों में लंबे हिंदी फिल्म करियर का निर्माण नहीं किया, लेकिन 'आदिपुरुष' (2023) के अलावा भी हिंदी सिनेमा में उनकी मौजूदगी रही है।

'साहो' को तेलुगु और हिंदी में एक साथ फिल्माया गया था और इसे व्यापक रूप से प्रभास की हिंदी सिनेमा में शुरुआत माना जाता है। 'राधे श्याम' का हिंदी में शूट किया गया संस्करण भी था। इसके अलावा 'बाहुबली', 'सालार' और 'कल्कि 2898 एडी' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी बाजार में बड़ी पहचान दिलाई, भले ही ये फिल्में बॉलीवुड प्रोडक्शन नहीं थीं।

प्रभास का बॉलीवुड से रिश्ता रेखा या श्रीदेवी जैसा नहीं रहा, लेकिन हिंदी दर्शकों के बीच उनके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका जन्म 1979 में मद्रास में एक तेलुगु फिल्म परिवार में हुआ था।

प्रभास के प्रशंसकों को उनकी पहली हिंदी फिल्म में उपस्थिति भी याद होगी। 2014 में प्रभु देवा की 'एक्शन जैक्सन' के गाने 'पंजाबी मस्त' में उन्होंने अजय देवगन और सोनाक्षी सिन्हा के साथ अचानक एक ऊर्जावान कैमियो किया था।
 

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