अजय देवगन, विक्की कौशल, अक्षय कुमार और रणवीर सिंह समेत कई बॉलीवुड सितारों ने बायोपिक फिल्मों में वास्तविक जीवन के नायकों और चर्चित हस्तियों की भूमिकाएं निभाईं।

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रितेश देशमुख, आमिर खान, अजय देवगन और राज कपूर समेत उन 18 बॉलीवुड सितारों की कहानी, जिन्होंने निर्देशन की कमान संभाली और बॉक्स ऑफिस पर अलग-अलग नतीजे देखे।

हिंदी एंटरटेनमेंट डेस्क
Written By: हिंदी एंटरटेनमेंट डेस्क
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रितेश देशमुख, आमिर खान, अजय देवगन और राज कपूर उन बॉलीवुड सितारों में शामिल हैं, जिन्होंने अभिनेता के साथ निर्देशक के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई।
रितेश देशमुख, आमिर खान, अजय देवगन और राज कपूर उन बॉलीवुड सितारों में शामिल हैं, जिन्होंने अभिनेता के साथ निर्देशक के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई।

बॉलीवुड में ऐसे सितारों की कमी नहीं है, जिन्होंने अभिनय के बाद निर्देशन की कमान भी संभाली। कुछ ने अपनी पसंद की कहानियों को पर्दे पर उतारा, कुछ ने परिवार के सदस्यों को लॉन्च करने के लिए फिल्में बनाईं, तो कुछ ने बड़ी फ्रेंचाइजी को नया रूप दिया। हालांकि, कैमरे के सामने लोकप्रिय होना और उसके पीछे सफल फिल्म बनाना दो अलग-अलग बातें हैं। कई सितारों को निर्देशन में बड़ी कामयाबी मिली, जबकि कुछ की फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले।

इन दिनों रितेश देशमुख अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘मस्ती’, ‘धमाल’, ‘हाउसफुल’, ‘एक विलेन’ और ‘रेड 2’ जैसी फिल्मों से हिंदी सिनेमा में पहचान बनाने वाले रितेश ने 2022 में मराठी फिल्म ‘वेड’ से निर्देशन में कदम रखा था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। 
अब वह ‘राजा शिवाजी’ के साथ लौटे हैं, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित मराठी-हिंदी ऐतिहासिक फिल्म है।

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रितेश अकेले ऐसे अभिनेता नहीं हैं, जिन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाया। आइए, उन 18 सितारों की फिल्मों और उनके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर नजर डालते हैं, जिन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी निभाई।

1. रितेश देशमुख: ‘वेड’ की सफलता के बाद ‘राजा शिवाजी’

रितेश देशमुख ने बतौर निर्देशक अपनी शुरुआत मराठी रोमांटिक ड्रामा ‘वेड’ से की थी। 30 दिसंबर 2022 को रिलीज हुई इस फिल्म में रितेश के साथ जेनेलिया देशमुख, जिया शंकर और अशोक सराफ नजर आए थे। फिल्म का निर्माण जेनेलिया ने किया था।

तेलुगु फिल्म ‘मजिली’ की रीमेक ‘वेड’ की कहानी प्यार, दिल टूटने, शराब की लत और भावनात्मक रूप से खुद को संभालने के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म को मराठी बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली और इसके दुनियाभर के कलेक्शन करीब 73 करोड़ रुपये बताए गए।

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इसके बाद रितेश ने ‘राजा शिवाजी’ का निर्देशन किया और इसमें अभिनय भी किया। 1 मई 2026 को मराठी और हिंदी में रिलीज हुई इस फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, बोमन ईरानी, फरदीन खान और जेनेलिया देशमुख सहित कई कलाकार शामिल हैं। सलमान खान ने फिल्म में खास भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने पांच दिनों में दुनियाभर में 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया।

2. आमिर खान: ‘तारे जमीन पर’ से निर्देशन में बनाई खास पहचान

आमिर खान ने 21 दिसंबर 2007 को रिलीज हुई ‘तारे जमीन पर’ से निर्देशक के तौर पर अपनी शुरुआत की। फिल्म में दर्शील सफारी, आमिर खान, टिस्का चोपड़ा और विपिन शर्मा ने अभिनय किया था।

कहानी ईशान नाम के एक ऐसे बच्चे की है, जिसे डिस्लेक्सिया होने के कारण उसका परिवार और स्कूल ठीक से समझ नहीं पाते। एक कला शिक्षक उसकी जिंदगी में बदलाव लाता है और उसे अपना आत्मविश्वास वापस पाने में मदद करता है।

यह फिल्म महज किसी स्टार का निर्देशन में उतरने का प्रयोग नहीं थी, बल्कि संवेदनशीलता और भावनाओं से जुड़ी कहानी थी। इसे समीक्षकों और दर्शकों, दोनों का अच्छा समर्थन मिला। फिल्म ने दुनियाभर में 98.50 करोड़ रुपये कमाए, जबकि भारत में इसका नेट कलेक्शन 62.95 करोड़ रुपये रहा। इसकी रिपोर्टेड लागत 12 करोड़ रुपये थी।

‘तारे जमीन पर’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। आमिर की अब तक की एकमात्र निर्देशित फिल्म को हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिना जाता है और इसने दिखाया कि कहानियों को लेकर उनकी संवेदनशीलता निर्देशन में भी नजर आती है।

3. अजय देवगन: अलग-अलग शैलियों में निर्देशन का प्रयोग

अजय देवगन उन अभिनेताओं में हैं, जिन्होंने बार-बार निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली। उनकी फिल्मों में अलग-अलग विषयों और बड़े स्तर पर कहानी कहने की कोशिश देखने को मिली है।

उन्होंने 11 अप्रैल 2008 को रिलीज हुई ‘यू मी और हम’ से निर्देशन की शुरुआत की। अल्जाइमर की बीमारी पर आधारित इस ड्रामा में काजोल भी थीं। फिल्म ने दुनियाभर में 39.62 करोड़ रुपये कमाए, जबकि इसका बजट 25 करोड़ रुपये बताया गया था। बॉक्स ऑफिस पर इसे खास सफलता नहीं मिली।
इसके बाद अजय ने 28 अक्टूबर 2016 को रिलीज हुई एक्शन फिल्म ‘शिवाय’ का निर्देशन किया। Sacnilk के मुताबिक, 100 करोड़ रुपये के रिपोर्टेड बजट वाली इस फिल्म ने दुनियाभर में 147.29 करोड़ रुपये कमाए।

2022 में उन्होंने ‘रनवे 34’ निर्देशित की, जिसमें अमिताभ बच्चन, रकुल प्रीत सिंह, बोमन ईरानी और अजय खुद नजर आए। फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 50.7 करोड़ रुपये रहा। 2023 में अजय ने ‘भोला’ का निर्देशन करने के साथ इसमें अभिनय भी किया। फिल्म ने दुनियाभर में 123 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया।

अजय की निर्देशित फिल्मों में बड़े पैमाने पर कहानी पेश करने और तकनीकी पक्ष पर ध्यान देने की कोशिश दिखाई देती है, हालांकि हर फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर समान सफलता नहीं मिली।

4. कंगना रनौत: ‘मणिकर्णिका’ से ‘इमरजेंसी’ तक

कंगना रनौत ने निर्देशन की दुनिया में ऐतिहासिक फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के साथ कदम रखा। इस फिल्म में उन्होंने कृष जगर्लामुडी के साथ निर्देशन का क्रेडिट साझा किया था।

25 जनवरी 2019 को रिलीज हुई फिल्म में कंगना ने रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभाई। उनके साथ जिस्शु सेनगुप्ता, मोहम्मद जीशान अय्यूब, डैनी डेन्जोंगपा और अंकिता लोखंडे भी नजर आए। फिल्म ने दुनियाभर में 142 करोड़ रुपये कमाए और भारत में इसका नेट कलेक्शन 98.02 करोड़ रुपये रहा। इसका रिपोर्टेड बजट 101 करोड़ रुपये था।

इसके बाद कंगना ने ‘इमरजेंसी’ का निर्देशन किया। 17 जनवरी 2025 को रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाया। फिल्म में अनुपम खेर, श्रेयस तलपड़े, महिमा चौधरी, मिलिंद सोमन और सतीश कौशिक भी थे।

Sacnilk के अनुसार, ‘इमरजेंसी’ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 23.81 करोड़ रुपये रहा। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर व्यावसायिक असफलता का सामना करना पड़ा। हालांकि, Netflix द्वारा इसके OTT राइट्स 80 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बाद फिल्म अपनी वित्तीय लागत की भरपाई करने में सफल रही।

5. आर. माधवन: ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ की अलग कामयाबी

आर. माधवन ने 1 जुलाई 2022 को रिलीज हुई ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ से निर्देशन में कदम रखा। इस बायोग्राफिकल ड्रामा में माधवन ने ISRO के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन की भूमिका निभाई थी। सिमरन ने अहम भूमिका निभाई, जबकि हिंदी और अंग्रेजी संस्करणों में शाहरुख खान तथा तमिल संस्करण में सूर्या ने कैमियो किया।

फिल्म में नंबी नारायणन के वैज्ञानिक काम, उन पर लगे झूठे जासूसी आरोप और न्याय पाने के लिए उनके लंबे संघर्ष को दिखाया गया। गंभीर विषय पर बनी इस फिल्म ने ब्लॉकबस्टर जैसा प्रदर्शन तो नहीं किया, लेकिन इसका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन सम्मानजनक रहा। Sacnilk के मुताबिक, फिल्म का दुनियाभर का ग्रॉस कलेक्शन 45 करोड़ रुपये से ज्यादा था।

फिल्म की बड़ी उपलब्धि बाद में सामने आई, जब इसे सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस सम्मान ने माधवन की पहली निर्देशित फिल्म को बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से आगे एक खास पहचान दी।

6. सनी देओल: ‘घायल वन्स अगेन’ और ‘पल पल दिल के पास’

सनी देओल ने 1999 में आई ‘दिल्लगी’ से निर्देशन की शुरुआत की थी। फिल्म में सनी के साथ बॉबी देओल और उर्मिला मातोंडकर थे। यह रोमांटिक ड्रामा देओल भाइयों को एक साथ पर्दे पर लाने के लिए भी उल्लेखनीय रहा।

हालांकि, सनी के निर्देशन में बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन का ज्यादा स्पष्ट आंकड़ा बाद की फिल्म ‘घायल वन्स अगेन’ के लिए मिलता है। 5 फरवरी 2016 को रिलीज हुई इस एक्शन फिल्म में सनी देओल, ओम पुरी, सोहा अली खान, नरेंद्र झा और युवा कलाकारों का समूह शामिल था। Sacnilk ने फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 57.60 करोड़ रुपये बताया, जबकि इसका रिपोर्टेड बजट 50 करोड़ रुपये था।

2019 में सनी ने अपने बेटे करण देओल को सहर बांबा के साथ लॉन्च करने के लिए ‘पल पल दिल के पास’ निर्देशित की। लेकिन यह फिल्म भी सिनेमाघरों में खास प्रभाव नहीं छोड़ सकी। सनी के निर्देशन में भावनात्मक और निजी कहानियों की झलक रही है, पर व्यावसायिक सफलता उनकी अभिनय यात्रा जैसी नहीं रही।

7. कुणाल खेमू: ‘मडगांव एक्सप्रेस’ बनी स्लीपर हिट

कुणाल खेमू हाल के वर्षों में सफल अभिनेता-निर्देशकों में शामिल हुए। बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत करने के बाद उन्होंने ‘कलयुग’, ‘गोलमाल 3’, ‘गो गोवा गॉन’, ‘लूटकेस’ और ‘मलंग’ जैसी फिल्मों में काम किया। 2024 में उन्होंने कॉमेडी फिल्म ‘मडगांव एक्सप्रेस’ से निर्देशन की शुरुआत की।

22 मार्च 2024 को रिलीज हुई इस फिल्म में दिव्येंदु, प्रतीक गांधी, अविनाश तिवारी, नोरा फतेही, उपेंद्र लिमये और छाया कदम नजर आए। कहानी बचपन के तीन दोस्तों की है, जिनकी लंबे समय से इंतजार की जा रही गोवा यात्रा जल्द ही अराजक हालात में बदल जाती है। इसमें ड्रग्स, अपराधियों और कई गलत फैसलों से जुड़ी घटनाएं शामिल हैं।

फिल्म की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर बड़ी नहीं रही, लेकिन दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने धीरे-धीरे इसे सफलता दिलाई। Sacnilk के मुताबिक, लंबे सिनेमाघर प्रदर्शन के बाद फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 46.90 करोड़ रुपये रहा।

अब इसके सीक्वल पर काम चल रहा है। दिव्येंदु ने हाल ही में पुष्टि की कि कुणाल इसकी स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं।

8. अरबाज खान: ‘दबंग 2’ से मिला फ्रेंचाइजी का फायदा

अरबाज खान ने निर्देशन में अपनी शुरुआत किसी नई कहानी से नहीं, बल्कि एक स्थापित फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म से की। उन्होंने 21 दिसंबर 2012 को रिलीज हुई ‘दबंग 2’ का निर्देशन किया। यह सलमान खान की हिट फिल्म ‘दबंग’ का सीक्वल थी।

फिल्म में सलमान खान, सोनाक्षी सिन्हा, अरबाज खान, प्रकाश राज, विनोद खन्ना और माही गिल ने काम किया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को बड़ी सफलता मिली। इसने दुनियाभर में 265 करोड़ रुपये कमाए, जबकि भारत में इसका नेट कलेक्शन 155 करोड़ रुपये रहा। इसका रिपोर्टेड बजट 84 करोड़ रुपये था और इसे ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया।

मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्मों में अभिनेता से निर्देशक बने सितारों की सफल फिल्मों में ‘दबंग 2’ का नाम खास तौर पर लिया जा सकता है।

9. श्रेयस तलपड़े: ‘पोस्टर बॉयज’ में कॉमेडी के साथ सामाजिक मुद्दा

अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए पहचाने जाने वाले श्रेयस तलपड़े ने ‘पोस्टर बॉयज’ के जरिए निर्देशन में कदम रखा। यह उनकी अपनी चर्चित मराठी फिल्म का आधिकारिक हिंदी रीमेक थी।

8 सितंबर 2017 को रिलीज हुई इस कॉमेडी फिल्म में सनी देओल, बॉबी देओल और श्रेयस तलपड़े ने अभिनय किया। कहानी तीन ऐसे पुरुषों की है, जिनकी तस्वीरें गलती से सरकारी नसबंदी पोस्टर पर छप जाती हैं। फिल्म ने नसबंदी जैसे वर्जित माने जाने वाले विषय को हास्य के जरिए पेश किया।

फिल्म को उसके संदेश और परिस्थितियों से पैदा होने वाले हास्य के लिए ठीक-ठाक समीक्षाएं मिलीं, लेकिन यह प्रतिक्रिया बड़े बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में नहीं बदल सकी। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 14.81 करोड़ रुपये रहा, जबकि इसका अनुमानित बजट 18 करोड़ रुपये था। इस वजह से इसे व्यावसायिक असफलता माना गया।

10. अनुपम खेर: ‘ओम जय जगदीश’ को नहीं मिली सफलता

अनुपम खेर ने 19 जुलाई 2002 को रिलीज हुई ‘ओम जय जगदीश’ से निर्देशन में हाथ आजमाया। वाशु भगनानी के निर्माण में बनी इस पारिवारिक फिल्म में वहीदा रहमान, अनिल कपूर, फरदीन खान, अभिषेक बच्चन, महिमा चौधरी, उर्मिला मातोंडकर और तारा शर्मा सहित कई कलाकार थे।

फिल्म की कहानी एक मां और उसके तीन बेटों के इर्द-गिर्द घूमती है। तीनों बेटे अपने-अपने सपनों, जिम्मेदारियों और पारिवारिक टकरावों से जूझते हैं। बड़े कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद फिल्म दर्शकों को आकर्षित नहीं कर सकी। Box Office India के मुताबिक, इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 13.74 करोड़ रुपये था, जबकि बजट 13 करोड़ रुपये बताया गया।

11. सोनू सूद: ‘फतेह’ से निर्देशन और एक्शन की दुनिया में कदम

सोनू सूद ने 10 जनवरी 2025 को रिलीज हुई ‘फतेह’ के साथ अभिनेता-निर्देशक की भूमिका निभाई। ‘युवा’, ‘जोधा अकबर’, ‘दबंग’, ‘सिंबा’ और कई दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम कर चुके सोनू ने इस हिंदी एक्शन थ्रिलर का निर्देशन करने के साथ इसमें अभिनय भी किया।

फिल्म में जैकलीन फर्नांडिस, नसीरुद्दीन शाह, विजय राज और दिव्येंदु भट्टाचार्य भी शामिल थे। साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी पर आधारित कहानी में सोनू एक खतरनाक गिरोह के खिलाफ लड़ने वाले एक्शन हीरो के रूप में नजर आए।

एक्शन और विषय के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ सकी। Sacnilk के अनुसार, ‘फतेह’ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 19.06 करोड़ रुपये रहा, जबकि भारत में इसका नेट कलेक्शन 13.36 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

12. कोंकणा सेन शर्मा: ‘अ डेथ इन द गंज’ को मिली समीक्षकों की सराहना

कोंकणा सेन शर्मा की पहली निर्देशित फिल्म ‘अ डेथ इन द गंज’ इस बात का उदाहरण है कि किसी फिल्म की सफलता का आकलन सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से नहीं किया जा सकता।

अंग्रेजी भाषा में बनी यह ड्रामा फिल्म 2 जून 2017 को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इसमें विक्रांत मैसी, तिलोत्तमा शोम, रणवीर शौरी, कल्कि कोचलिन, गुलशन देवैया, जिम सर्भ, ओम पुरी और तनुजा नजर आए।

फिल्म का सिनेमाघरों में प्रदर्शन सीमित रहा और इसने करीब 1 करोड़ रुपये कमाए। लेकिन समीक्षकों के बीच इसे बड़ी सफलता मिली। फिल्म को कई फिल्मफेयर नामांकन मिले और कोंकणा ने सर्वश्रेष्ठ डेब्यू निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता।

कोंकणा का उदाहरण दिखाता है कि निर्देशन में आने वाले सभी कलाकार ब्लॉकबस्टर बनाने की दौड़ में नहीं होते। कुछ ऐसी फिल्में बनाते हैं, जिनकी अहमियत शुरुआती बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से आगे जाती है।

13. हेमा मालिनी: ‘दिल आशना है’ और ‘टेल मी ओ ख्खुदा’

हिंदी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में शामिल हेमा मालिनी ने भी निर्देशन में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। उनकी निर्देशित फिल्म ‘दिल आशना है’ 1992 में रिलीज हुई थी। इसमें दिव्या भारती, शाहरुख खान, जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, डिंपल कपाड़िया, अमृता सिंह और सोनू वालिया ने अभिनय किया था।

यह फिल्म शाहरुख खान की शुरुआती साइन की गई फिल्मों में से एक के तौर पर याद की जाती है, हालांकि ‘दीवाना’ इससे पहले रिलीज हुई थी।
कई साल बाद हेमा ने 2011 में रिलीज हुई ‘टेल मी ओ ख्खुदा’ का निर्देशन और निर्माण किया। फिल्म में ईशा देओल, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, ऋषि कपूर, फारूक शेख, हेमा मालिनी और अर्जन बाजवा शामिल थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।

14. राकेश रोशन: ‘कहो ना... प्यार है’ से ‘कृष 3’ तक

राकेश रोशन ने अभिनय से शुरुआत की, लेकिन बाद में बॉलीवुड के सफल अभिनेता-निर्देशकों में अपनी जगह बनाई। उनकी निर्देशित फिल्मों में ‘खुदगर्ज’, ‘खून भरी मांग’, ‘करण अर्जुन’, ‘कहो ना... प्यार है’, ‘कोई... मिल गया’ और ‘कृष’ फ्रेंचाइजी शामिल हैं।

निर्देशन में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक ऋतिक रोशन को ‘कहो ना... प्यार है’ के जरिए रातोंरात लोकप्रिय बनाना और आगे चलकर उनके इर्द-गिर्द सुपरहीरो की दुनिया तैयार करना रही।

राकेश रोशन की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली निर्देशित फिल्म ‘कृष 3’ है, जो 1 नवंबर 2013 को रिलीज हुई थी। फिल्म में ऋतिक रोशन, प्रियंका चोपड़ा, विवेक ओबेरॉय और कंगना रनौत ने अभिनय किया। यह बड़ी ब्लॉकबस्टर बनी और दुनियाभर में 374 करोड़ रुपये कमाए। इसमें भारत का ग्रॉस कलेक्शन 313 करोड़ रुपये शामिल था।

15. राज कपूर: अभिनय और निर्देशन की विरासत

अभिनेता से निर्देशक बने सितारों की चर्चा राज कपूर के बिना पूरी नहीं हो सकती। हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेता-फिल्मकारों में शामिल राज कपूर ने 1948 में ‘आग’ से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने आर.के. फिल्म्स के जरिए आजादी के बाद के बॉलीवुड को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।

‘आग’ को समीक्षकों से सराहना मिली, लेकिन यह व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हुई। इसके बाद ‘बरसात’ स्टूडियो की पहली हिट बनी और राज कपूर-नरगिस की जोड़ी को स्थापित करने में मददगार साबित हुई।

राज कपूर की निर्देशकीय विरासत आगे चलकर ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘संगम’, ‘मेरा नाम जोकर’, ‘बॉबी’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘प्रेम रोग’ और ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी फिल्मों से और व्यापक हुई। Britannica के मुताबिक, आर.के. फिल्म्स की कई प्रस्तुतियों को समीक्षकों की सराहना के साथ व्यावसायिक सफलता भी मिली।

16. मनोज कुमार: देशभक्ति की कहानियों से मिली बड़ी सफलता

मनोज कुमार भी उन प्रमुख अभिनेताओं में शामिल थे, जिन्होंने निर्देशन में अपनी अलग पहचान बनाई। पहले से सफल अभिनेता रहे मनोज कुमार ने फिल्मों के जरिए राष्ट्रवाद और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता दी। इसी छवि के कारण उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना गया।
Box Office India ने उनके निर्देशन के दौर को “ब्लॉकबस्टर के बाद ब्लॉकबस्टर” के रूप में बताया। उनकी निर्देशित फिल्मों में ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘शोर’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘क्रांति’ शामिल हैं।

इन फिल्मों में भारतीय पहचान, देशभक्ति, ग्रामीण जीवन, बेरोजगारी, त्याग और सामाजिक संघर्ष जैसे विषय प्रमुख रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनोज कुमार की निर्देशित कई फिल्मों ने भारत में अकेले 4 से 5 करोड़ नहीं, बल्कि 40-50 मिलियन टिकटों की बिक्री दर्ज की। यह उनके व्यापक दर्शक वर्ग का पैमाना दिखाता है।

17. देव आनंद: ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ की बड़ी कामयाबी

देव आनंद निर्देशन में आने से पहले ही हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय हीरो थे। उन्होंने 1970 में ‘प्रेम पुजारी’ से निर्देशन की शुरुआत की। शांति और युद्ध के विषय पर बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन इसकी असफलता ने देव आनंद को निर्देशन से दूर नहीं किया।
उनकी अगली बड़ी निर्देशित फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ जबरदस्त हिट साबित हुई। इस फिल्म ने जीनत अमान को हिंदी सिनेमा में एक ऐसी भूमिका के साथ पेश किया, जिसने उन्हें रातोंरात लोकप्रिय बना दिया।

दिसंबर 1971 में रिलीज हुई फिल्म में देव आनंद, जीनत अमान, मुमताज और प्रेम चोपड़ा ने अभिनय किया। कहानी में हिप्पी संस्कृति, ड्रग्स, परिवारों के टूटने और पश्चिमीकरण जैसे विषयों को जगह मिली। फिल्म का संगीत, खासकर ‘दम मारो दम’, लंबे समय तक लोकप्रिय रहा।

इस फिल्म के जरिए देव आनंद ने दिखाया कि वह अभिनय, निर्माण, लेखन और निर्देशन की जिम्मेदारियां एक ही फिल्म में संभाल सकते हैं। बाद में उन्होंने /नवकेतन बैनर के तहत कई और फिल्मों का निर्देशन किया।

18. फिरोज खान: ‘कुर्बानी’ बनी निर्देशन की सबसे बड़ी जीत

फिरोज खान की निर्देशन यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘कुर्बानी’ रही, जो जून 1980 में रिलीज हुई थी। फिरोज खान ने इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन करने के साथ मुख्य भूमिका भी निभाई। फिल्म में विनोद खन्ना, जीनत अमान, अमजद खान, अमरीश पुरी, अरुणा ईरानी और शक्ति कपूर भी थे।
एक्शन, रोमांस, अपराध, ग्लैमर और संगीत को साथ लेकर चलने वाली ‘कुर्बानी’ ब्लॉकबस्टर साबित हुई और 1980 की सबसे बड़ी हिंदी फिल्मों में शामिल रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म का बजट करीब 2.5 करोड़ रुपये था और इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन लगभग 25.8 करोड़ रुपये रहा।
‘आप जैसा कोई’ और ‘लैला ओ लैला’ जैसे गानों ने फिल्म को लोकप्रिय संस्कृति में लंबे समय तक यादगार बनाए रखा।

निर्देशन में सफलता की कोई तय गारंटी नहीं

बॉलीवुड में अभिनेता से निर्देशक बने सितारों की कहानियां अलग-अलग नतीजों से भरी हैं। राज कपूर, मनोज कुमार, राकेश रोशन, फिरोज खान, आमिर खान, अरबाज खान, रितेश देशमुख और कुणाल खेमू जैसे नामों ने निर्देशन के जरिए बड़ी व्यावसायिक या सांस्कृतिक सफलताएं हासिल कीं। दूसरी ओर, अजय देवगन, कंगना रनौत, सनी देओल और सोनू सूद जैसे सितारों की फिल्मों के बॉक्स ऑफिस नतीजे मिले-जुले रहे।

यह सूची पूरी नहीं है। नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर, सतीश कौशिक, पूजा भट्ट, शशि कपूर, नाना पाटेकर, राहुल बोस, नंदिता दास और रेवती जैसे कलाकारों ने भी फिल्मों का निर्देशन किया है। इसके अलावा, गुरु दत्त, किशोर कुमार और महमूद जैसे पुराने दौर के कलाकार भी अभिनय के साथ निर्देशन में सक्रिय रहे।

इन सभी उदाहरणों से एक बात साफ होती है: अभिनय में मिली सफलता निर्देशन का रास्ता खोल सकती है, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी की गारंटी नहीं देती।
 

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