सिर्फ 2 करोड़ रुपये में बनी ‘हनुमान अंश’ कैसे बनी 2026 की सबसे मुनाफेदार फिल्म
‘हनुमान अंश’ ने 10 लाख रुपये की मामूली ओपनिंग से शुरुआत की, लेकिन चौथे वीकेंड में कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए। जानिए नीम करौली बाबा पर बनी इस फिल्म की कहानी, स्टारकास्ट, बजट, बॉक्स ऑफिस और सीक्वल से जुड़ी पूरी जानकारी।
September 02, 2026 | 13:04 IST
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Sep 02, 2026 13:10 IST
2026 में जब बॉक्स ऑफिस पर बड़े सितारों, सीक्वल और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों का दबदबा रहा, उसी बीच एक ऐसी फिल्म ने चौंका दिया, जिस पर शुरुआत में शायद ही किसी का ध्यान गया हो। करीब 2 करोड़ रुपये में बनी ‘हनुमान अंश’ ने सिनेमाघरों में महज 10 लाख रुपये की कमाई के साथ शुरुआत की। रिलीज के पहले दो हफ्तों तक भी फिल्म बेहद छोटी थिएट्रिकल रिलीज जैसी ही नजर आई। लेकिन इसके बाद कहानी पूरी तरह बदल गई।
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फिल्म ने चौथे वीकेंड में पहले वीकेंड से कहीं ज्यादा कारोबार किया। बिना किसी सुपरस्टार, बड़े प्रचार अभियान या भारी-भरकम मार्केटिंग के यह आध्यात्मिक ड्रामा धीरे-धीरे दर्शकों तक पहुंचा और फिर इसकी कमाई थमने का नाम नहीं ले रही थी।
बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों ने ‘हनुमान अंश’ को चर्चा में जरूर ला दिया है, लेकिन इस कहानी का दिलचस्प हिस्सा सिर्फ कमाई नहीं है। फिल्म के केंद्र में कौन से संत हैं? नीम करौली बाबा की कहानी का नाम हनुमान से क्यों जोड़ा गया है? क्या यह बायोपिक है, भक्ति फिल्म है या उनके भक्तों से जुड़ी घटनाओं का नाटकीय रूपांतरण? और जब इसका दूसरा हिस्सा भी लिखा जा रहा है, तो फिल्म को लेकर जानने लायक क्या-क्या है?
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क्या है ‘हनुमान अंश’?
‘हनुमान अंश’ हिंदी भाषा की आध्यात्मिक ड्रामा फिल्म है, जो नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित है। भक्त उन्हें प्यार से महाराज-जी भी कहते हैं। फिल्म को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और निर्देशित किया है। यू सर्टिफिकेट वाली यह 150 मिनट लंबी फिल्म 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
फिल्म का निर्माण स्वंभू मीडिया नेटवर्क के बैनर तले हुआ है। विशाल चतुर्वेदी, अनुप्रिया नगर, नम्रता जी सिंह और रागिनी सोना इसके निर्माताओं में शामिल हैं। बॉलीवुड हंगामा ने इसे बायोग्राफिकल ड्रामा की श्रेणी में रखा है, हालांकि विशाल चतुर्वेदी ने साफ किया है कि उनका इरादा नीम करौली बाबा की जन्म से मृत्यु तक की पारंपरिक बायोपिक बनाने का नहीं था।
‘हनुमान अंश’ की कहानी क्या है?
कहानी की शुरुआत बालक लक्ष्मीनारायण से होती है। अपनी मां को खोने के बाद वह मृत्यु को एक बच्चे की सहज और बेहद मार्मिक समझ के जरिए समझने की कोशिश करता है। जब उसे बताया जाता है कि उसकी मां भगवान राम के पास चली गई हैं, तो वह मान लेता है कि राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान ही उसे अपनी मां तक पहुंचा सकते हैं।
मां की तलाश से शुरू हुआ यह निजी सफर आगे चलकर उत्तर भारत की लंबी यात्रा में बदल जाता है। रास्ते में लक्ष्मीनारायण संतों, भक्तों और आम लोगों से मिलता है, दुख-दर्द को करीब से देखता है और धीरे-धीरे समझने लगता है कि आस्था सिर्फ उससे दूर भागने का नाम नहीं, बल्कि सेवा करने का रास्ता भी है।
फिल्म 13 साल की उम्र से उसके उस रूप तक की यात्रा दिखाती है, जिसे आगे चलकर नीम करौली बाबा के नाम से याद किया गया। यहां कहानी का टकराव किसी पारंपरिक खलनायक से नहीं है। विशाल चतुर्वेदी ने इंडिया टुडे को बताया था कि फिल्म में असली बाधाएं इंसानी आदतें, व्यवहार और सोचने के तरीके हैं।
फिल्म में एक दादा अपने पोते को संत की कहानियां सुनाते हैं, जो अलग-अलग घटनाओं को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है। इस लिहाज से ‘हनुमान अंश’ एक आध्यात्मिक यात्रा की कहानी है, जिसमें न कोई सुपरहीरो वाला अंदाज है, न सीजीआई सेनाओं का प्रदर्शन और न ही किसी अंतिम खलनायक से निर्णायक मुकाबला।
क्या सच्ची कहानी पर आधारित है ‘हनुमान अंश’?
हां, लेकिन इसे पूरी तरह प्रमाणित जीवनी कहना सही नहीं होगा। फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन, उनसे जुड़े स्थानों और किताबों, ऑनलाइन अभिलेखों तथा मौखिक रूप से दर्ज घटनाओं से प्रेरणा लेती है।
विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, उनकी टीम ने ऐसी सामग्री का इस्तेमाल करने की कोशिश की जिसे वह दस्तावेजी और विश्वसनीय मानती थी। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं को एक सहज पटकथा में जोड़ने के लिए कुछ सिनेमाई स्वतंत्रता भी ली गई।
निर्देशक ने अपनी रिसर्च को ‘Divine Detour’ नाम की किताब में भी संकलित किया था। यही किताब आगे चलकर फिल्म की बुनियाद बनी।
कौन थे नीम करौली बाबा?
नीम करौली बाबा, जिन्हें नीब करौरी बाबा भी लिखा जाता है, 20वीं सदी के हिंदू आध्यात्मिक गुरु थे। भगवान हनुमान के प्रति उनकी गहरी भक्ति और प्रेम, लोगों को भोजन कराने तथा निस्वार्थ सेवा पर उनका जोर उनकी शिक्षाओं का अहम हिस्सा रहा।
उनके शुरुआती जीवन से जुड़ी जानकारियां अलग-अलग स्रोतों में हमेशा एक जैसी नहीं मिलतीं। राम दास ने भी इस बात को रेखांकित किया था कि उनके बारे में तथ्य कम और कहानियां ज्यादा हैं। हालांकि, उत्तर भारत में उनके आश्रमों, खासकर नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम, से उनका गहरा संबंध अच्छी तरह स्थापित है। 1973 में उनका निधन हुआ।
नीम करौली बाबा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में हार्वर्ड के पूर्व प्रोफेसर रिचर्ड अल्पर्ट की भी बड़ी भूमिका रही, जिन्हें महाराज-जी ने बाद में राम दास नाम दिया। 1967 में भारत में बाबा से मिलने के बाद राम दास ने उनकी शिक्षाओं को पश्चिमी पाठकों तक पहुंचाया। उनकी 1971 में प्रकाशित किताब ‘Be Here Now’ काउंटरकल्चर की चर्चित किताबों में शामिल हुई।
एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 में नीम करौली बाबा की तलाश में भारत आए थे, लेकिन तब तक बाबा का निधन हो चुका था। कई साल बाद मार्क जुकरबर्ग ने सार्वजनिक रूप से बताया कि जॉब्स ने उन्हें उस भारतीय मंदिर में जाने की सलाह दी थी, जो उनके लिए महत्वपूर्ण रहा था।
यही कड़ी—भारत के एक साधु से लेकर सिलिकॉन वैली की कहानियों तक—समझाती है कि आज कैंची धाम भारत से बाहर के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र क्यों बना हुआ है।
फिल्म का नाम ‘हनुमान अंश’ क्यों रखा गया?
नाम सुनकर पहली नजर में किसी को लग सकता है कि यह भगवान हनुमान पर बनी फिल्म है। लेकिन ऐसा नहीं है।
‘अंश’ का अर्थ हिस्सा या किसी का अंश होता है। फिल्म का शीर्षक उस मान्यता से जुड़ा है, जिसके अनुसार भक्त नीम करौली बाबा में हनुमान जैसी भक्ति और सेवा की भावना देखते हैं। फिल्म में भी यह संबंध उस बच्चे की सोच से शुरू होता है, जो मानता है कि हनुमान उसे राम तक पहुंचा सकते हैं। आगे चलकर यही विचार भूखों को खाना खिलाने और दूसरों की देखभाल करने को आस्था की अभिव्यक्ति के रूप में सामने लाता है।
हालांकि, विशाल चतुर्वेदी ने इस शब्द को बाबा की दिव्यता के बारे में किसी वस्तुनिष्ठ घोषणा के तौर पर पेश नहीं किया है। उनके मुताबिक, नीब करौरी गांव में रिसर्च के दौरान स्थानीय लोगों ने बाबा को “अंशिक हनुमान” या “अंशिक अवतार” बताया था। इसी विचार से उन्होंने ‘हनुमान अंश’ नाम चुना।
‘हनुमान अंश’ में कौन-कौन कलाकार हैं?
फिल्म में वयस्क नीम करौली बाबा की भूमिका शोभिनव सत्या ने निभाई है, जबकि 13 साल के महाराज-जी का किरदार विहान शेडगे ने निभाया है।
मुख्य सहायक कलाकारों में चंदन आनंद बतौर भोंसले, पूर्णिमा तिवारी बतौर रामबेटी, अनिल रस्तोगी बतौर महंत जी और गुलशन पांडे बतौर इंस्पेक्टर धर्म सिंह नजर आते हैं।
फिल्म ने किसी पहचाने हुए बड़े स्टार के बजाय चरित्र कलाकारों और नए चेहरों पर भरोसा किया है। दोनों प्रमुख कलाकारों की भूमिकाएं भी अलग-अलग तरह की चुनौती लेकर आती हैं। शेडगे को उस शुरुआती दौर का दुख, जिज्ञासा और बेचैनी दिखानी है, जो लक्ष्मीनारायण की यात्रा की वजह बनती है। वहीं सत्या को महाराज-जी की आध्यात्मिक मौजूदगी पर्दे पर उतारनी है, बिना उन्हें सिर्फ एक गंभीर और स्थिर संत की छवि में बदलने के।
कौन हैं शोभिनव सत्या?
शोभिनव सत्या की फिल्म में मुख्य भूमिका तक पहुंचने की कहानी किसी फिल्मी प्रचारक की बनाई हुई कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन अभिनेता और निर्देशक दोनों ने इस घटना के बारे में बताया है।
सत्या फिल्म में बतौर सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रहे थे और प्रॉप्स सहित प्रोडक्शन की कई जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। जिस अभिनेता को शुरुआत में मुख्य भूमिका के लिए चुना गया था, उसके बीमार पड़ने के बाद विशाल चतुर्वेदी ने आखिरकार कैमरे के पीछे काम कर रहे सत्या को ही कैमरे के सामने उतार दिया।
यह फैसला पूरी तरह अचानक भी नहीं था। सत्या के मुताबिक, वह 2009 से भक्त हैं, 2018 से मंगलवार का हनुमान व्रत रखते हैं और शाकाहारी, आध्यात्मिक जीवनशैली का पालन करते हैं।
विशाल चतुर्वेदी ने उनसे संत की भूमिका निभाते समय बनावटी अंदाज अपनाने के बजाय उनके स्वाभाविक बोलने, हंसने और लोगों से बातचीत करने के तरीके को बरकरार रखने के लिए कहा।
कैसे बनी ‘हनुमान अंश’?
विशाल चतुर्वेदी के मन में इस फिल्म का विचार करीब दो दशक से था। इसकी शुरुआत उस समय हुई, जब नैनीताल में तैनाती के दौरान वह अचानक कैंची धाम पहुंचे थे।
करीब 2009 से अनौपचारिक रिसर्च शुरू हुई। 2016-17 में उन्होंने नीम करौली बाबा से जुड़ी कहानियां व्यवस्थित रूप से जुटानी शुरू कीं और 2022-23 में यह काम और तेज हो गया। उनकी रिसर्च यात्रा वृंदावन, अकबरपुर, नीब करौरी और लखनऊ तक पहुंची, जहां उन्होंने बाबा से जुड़े लोगों से मुलाकात की और उनके अनुभव व किस्से जुटाए।
फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग चित्रकूट में हुई। विशाल चतुर्वेदी ने बताया था कि टीम ने अनजाने में पंजाबी बाबा आश्रम में एक कमरा चुना था। बाद में उन्हें बताया गया कि नीम करौली बाबा कभी उसी कमरे में ठहरे थे।
फिल्म की शूटिंग के दौरान भी निर्माताओं ने कुछ खास नियमों का पालन किया। सेट पर सिर्फ शाकाहारी खाना रखा गया। शराब, गाली-गलौज और लड़ाई-झगड़े से परहेज किया गया। शूट की शुरुआत और अंत हनुमान चालीसा के साथ होता था।
पारंपरिक मार्केटिंग अभियान के लिए सीमित बजट होने के कारण निर्माताओं ने आठ भंडारों का आयोजन भी किया। ये आयोजन फिल्म के जमीनी स्तर पर प्रचार का जरिया भी बने।
‘हनुमान अंश’ का बजट कितना है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी है। हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस और अन्य प्रकाशनों ने भी यही आंकड़ा प्रकाशित किया है।
हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि 2 करोड़ रुपये की रकम में फिल्म के सभी मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च शामिल हैं या नहीं।
‘हनुमान अंश’ ने कितनी कमाई की?
7 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म ने भारत में सिर्फ 10 लाख रुपये नेट की ओपनिंग की। पहले हफ्ते में कमाई 1.08 करोड़ रुपये रही, जबकि दूसरे हफ्ते में फिल्म ने सिर्फ 40 लाख रुपये जोड़े।
इसके बाद फिल्म की कमाई का ग्राफ अचानक बदल गया। 17वें दिन फिल्म ने 2.20 करोड़ रुपये कमाए। तीसरे हफ्ते की कमाई 10.40 करोड़ रुपये पहुंची। चौथे वीकेंड में शुक्रवार को 6.25 करोड़, शनिवार को 9.25 करोड़ और रविवार को 12.75 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
25वें दिन के अंत तक Sacnilk के ट्रैकर के मुताबिक, फिल्म की भारत में नेट कमाई करीब 45.63 करोड़ रुपये पहुंच गई थी, जबकि दुनिया भर में इसका ग्रॉस कलेक्शन 53.82 करोड़ रुपये था।
करीब 2 करोड़ रुपये के कथित बजट के मुकाबले ये आंकड़े असाधारण हैं। इसी वजह से कई रिपोर्ट्स ने ‘हनुमान अंश’ को 2026 की भारत की सबसे मुनाफेदार फिल्म बताया है। हालांकि, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और निर्माताओं के खाते में आने वाला वास्तविक मुनाफा एक ही चीज नहीं हैं। टिकट बिक्री से हुई रकम में थिएटर, डिस्ट्रीब्यूटर, टैक्स और अन्य खर्चों की हिस्सेदारी होती है।
‘हनुमान अंश’ क्यों हुई इतनी सफल?
किसी फिल्म के अचानक चल पड़ने की एक वजह तय करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब उसकी रिलीज के तीन हफ्ते बाद उसकी रफ्तार बढ़ने लगे। ‘हनुमान अंश’ के मामले में सबसे स्पष्ट वजह दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया नजर आती है।
सोशल मीडिया पर फिल्म की तारीफ बढ़ी, दर्शकों की संख्या बढ़ी और मांग को देखते हुए सिनेमाघरों में शो बढ़ाए गए। आंकड़ों से भी यही तस्वीर सामने आती है। फिल्म सिर्फ अपनी कमाई बरकरार रखने में सफल नहीं हुई, बल्कि उसकी कमाई कई गुना बढ़ गई।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती चर्चा के बाद सिनेमाघरों ने फिल्म के शो बढ़ाए। जहां शुरुआती वीकेंड में फिल्म ने करीब 60 लाख रुपये कमाए थे, वहीं चौथे वीकेंड की कमाई लगभग 28 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
फिल्म के विषय ने भी इसे अलग-अलग उम्र के बड़े भक्त दर्शक वर्ग तक पहुंचने में मदद की। विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, ‘हनुमान’ नाम, हनुमान चालीसा का एक प्रमुख सीक्वेंस, नीम करौली बाबा की लोकप्रियता और फिल्म का परिवार के साथ देखने लायक होना इसके पक्ष में गया।
शुरुआत कमजोर होने से फिल्म को एक और फायदा मिला—एक छोटे बजट की अंडरडॉग कहानी। हर नई छलांग खबर बनती गई और हर नई रिपोर्ट उन दर्शकों तक फिल्म का नाम पहुंचाती गई, जिन्हें इसकी रिलीज के बारे में पहले पता तक नहीं था।
क्या आएगा ‘हनुमान अंश’ का पार्ट 2?
हां। इसका दूसरा हिस्सा सिर्फ फैंस की अटकल नहीं है। फिल्म के अंत में एक संकेत दिया गया है कि नीम करौली बाबा की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। विशाल चतुर्वेदी ने भी पुष्टि की है कि दूसरे पार्ट पर काम शुरू हो चुका है।
फिल्म के अंत का पूरा विवरण सामने लाए बिना इतना कहा जा सकता है कि अगली कड़ी में फिरोजाबाद पर खास ध्यान दिया जाएगा, जिसे निर्देशक ने बाबा का जन्मस्थान बताया है। इसके बाद कहानी आगरा और मथुरा की ओर बढ़ेगी, जहां बाबा के पारिवारिक संबंध अगली कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
दरअसल, निर्माताओं ने फरवरी 2026 में ही ‘हनुमान अंश’ को ट्रिलॉजी के रूप में घोषित कर दिया था। इसकी कहानी विशाल चतुर्वेदी की किताब ‘Divine Detour’ से ली गई सामग्री पर आधारित है।
‘हनुमान अंश’ कहां देख सकते हैं?
फिलहाल इस फिल्म को देखने का रास्ता वही है, जिससे इसकी पूरी बॉक्स ऑफिस कहानी शुरू हुई थी—सिनेमाघर।
‘हनुमान अंश’ अभी भी थिएटर्स में चल रही है। किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म या स्ट्रीमिंग रिलीज की तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
जब इसकी ओटीटी रिलीज का ऐलान होगा, तब फिल्म के लिए एक और परीक्षा होगी—क्या सिनेमाघरों में अप्रत्याशित रूप से सफल रही यह छोटी फिल्म घर बैठे दर्शकों के बीच इससे भी बड़ी जगह बना पाएगी?











